sparsh edition Oct 20162

रचंनात्मक लेखन
-महती, कक्षा ९ अ

राजू कक्षा ८ का विद्यार्थी था।  उसके चार भाई - बहन थे।  उसके पिता एक छोटे से स्कूल में अध्यापक थे।  बहुत अधिक आय न होने पर भी घर आसानी से चल जाता था।  राजू का स्कूल घर से दूर था।  राजू के स्कूल में शिक्षक दिवस के लिये आयोजन हो रहे थे।  स्कूल में कहा गया कि हर बच्चे को अध्यापक के लिए एक तोफा लाना पड़ेगा।  राजू के माता -पिता यह सुनकर बहुत परेशान हुए थे--- जितने पैसे थे उससे तो घर का खर्च आसानी से चल जाता, लेकिन इस तोफे के लिए और पैसे कहाँ से लाए? शिक्षक दिवस के लिए सिर्फ दो दिन बचे थे और राजू के पास ना तो तोफा था और ना ही तोफे के लिए पैसे।  

एक दिन, जब स्कूल से घर लौट आ रहा था, उसे सड़क पर एक छोटा-सा बस्ता दिखाई दी।  जब पास आकर देखा तो उसमें सोने के सिक्के! राजू को डर था की उसे कोई देख न ले?

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दो घड़े
RITHIVIKA-3B

एक घड़ा मिटटी का बना था,दूसरा पीतल का | दोनों नदी के किनारे रखे थे उस नदी में बाढ़ आ गई, नदी के बहाव में दोनों घड़े बहते चले गये बहुत समय तक मिटटी के घड़े ने अपने आप को पीतल वाले घड़े से काफी दूर रखना चाहा |ये देखकर पीतल वाले घड़े ने कहा “तुम डरो नहीं दोस्त मैं तुम्हे धक्का नही लगाऊंगा” |

मिटटी के घड़े ने जवाब दिया “तुम जानबूझ कर धक्के नही लगाओगे, सही हैं मगर नदी के बहाव में हम जरुर टकरायेंगे |अगर ऐसा हुआ तो तुम्हारे बचाने पर भी मैं तुम्हारे धक्को से बच ना सकूँगा और मेरे टुकड़े-टुकड़े हो जायेंगे इसलिए अच्छा है की हम दोनों अलग-अलग रहे” |

शिक्षा –जिससे तुम्हारा नुकसान हो रहा हो, उससे अलग ही रहना अच्छा है, चाहे वह उस समय के लिए तुम्हारा दोस्त ही क्यों न हो |   

तन से बढ़कर मन का सौन्दर्य है
Aashrita- 3C

महाकाव्य “मेघदूत” के रचयिता कालिदास “मूर्ख” नाम से प्रसिद्ध है ,जिनका विवाह सुन्दर व महान गुणवती विधोतमा से हुआ था उन महाकवि से राजा विक्रमादित्य ने एक दिन अपने दरबार में पूछा “क्या कारण है, आपका शरीर मन और बुद्दी के अनुरूप नही नही है ?” इसके उत्तर में कलिदास ने अगले दिन दरबार में सेवक से दो घड़ों में पिने का पानी लेन को कहा | वह जल से भरा एक स्वर्ण निर्मित घड़ा और दूसरा मिटटी का घड़ा ले आया |

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खरगोश और कछुआ
Tharun - 3B

एक घने जंगल में एक खरगोश और कछुआ रहते थे | एक दिन खरगोश ने कछुए को दौड़ लगाने को कहा | फिर खरगोश कछुए ने दौड़ना शरू किया खरगोश बहुत दूर निकल आया कछुआ बहुत पीछे रह गया | खरगोश ने पीछे देखा तो उसे दूर तक कछुआ नही दिखा उसने सोचा कि थोड़ा आराम कर लेता हूँ ये सोचते हुए ऐसे ही वो सो गया | और कछुआ जीत गया |